जाने हमारे बारे में

योग भारत में एक आध्यात्मिक प्रकिया को कहते हैं जिसमें शरीर,
मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है

हमारे योग केंद्र

योग गुरु नंदकिशोर के संरक्षण में स्थापित श्री कृष्ण योग धाम मध्य भारत की अवंतिका नगरी (उज्जैन) में स्थित है। यह एक शक्तिशाली धार्मिक स्थान है जो दुनिया के सभी हिस्सों से लोगों को अपनी ओर खींचता है।

योग का महत्व

योग का लक्ष्य स्वास्थ्य में सुधार से लाकर मोक्ष प्राप्त करने तक है। महाभारत में, योग का लक्ष्य ब्रह्मा के दुनिया में प्रवेश के रूप में वर्णित किया गया है, ब्रह्म के रूप में, अथवा आत्मन को अनुभव करते हुए जो सभी वस्तुएँ मे व्याप्त है।

वेदों में योग

भगवद गीता बड़े पैमाने पर विभिन्न तरीकों से योग शब्द का उपयोग करता है। एक पूरा अध्याय (छठा अध्याय) सहित पारंपरिक योग का अभ्यास को समर्पित, ध्यान के सहित, करने के अलावा इस मे योग के तीन प्रमुख प्रकार का परिचय किया जाता है।

योगाचार्य नंदकिशोर
योगाचार्य नंदकिशोर शिष्य स्वामी शक्तिश्वरानंद जी सरस्वती (पंडित बलदेव प्रसाद जी आर्य “पंडित जी”) आज से करीब 30 वर्ष पूर्व योग विद्या के मर्मज्ञ ज्ञाता पंडित बलदेव प्रसाद आर्य “पंडित जी” जो सन्यास दीक्षा के बाद स्वामी शक्तिश्वरानंद सरस्वती के नाम से विख्यात हुए, उनका सानिध्य प्राप्त हुआ | प्रारब्ध का संयोग और गुरु के आशीर्वाद से योग का रंग चढ़ता गया एवं जीवन योगमय होता गया | गुरुजी ने सन्यास के बाद भगवान महाकालेश्वर की नगरी अवंतिका में महाकाल मंदिर के पास ही एक योग आश्रम की स्थापना की, जहां वे जीवन पर्यंत योग साधना एवं मानव सेवा करते रहे| उन्ही गुरु का आशीर्वाद एवं अंश स्वरूप प्रसाद श्री कृष्ण योग धाम संस्था विगत 20 वर्षों से अनवरत योग विद्या के द्वारा मानव सेवा में रहते हैं, जहां शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक साधना द्वारा सैकड़ों साधक लाभांवित हो रहे हैं| ऐसे अनेकों रोगियों को लाभ हुआ है जो असाध्य रोगों से ग्रस्त थे तथा वे आज स्वस्थ एवं निरोगी जीवन जी रहे हैं |यही प्रभु सेवा है| वर्तमान में भी प्रतिवर्ष नगर के विभिन्न स्थानों में निशुल्क योग शिविर का आयोजन कर समाज के सभी वर्गों का सहृदय भाव से योग एवं आध्यात्म की शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर मानव मात्र को योग मार्ग में प्रेरित कर स्वस्थ जीवन जीने का योगमय विज्ञान प्रदान किया जा रहा है|


अष्टांग योग साधना

अष्टांग योग महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्तवृत्ति के निरोध का नाम योग है (योगश्चितवृत्तिनिरोध:)। इसकी स्थिति और सिद्धि के निमित्त कतिपय उपाय आवश्यक होते हैं जिन्हें 'अंग' कहते हैं और जो संख्या में आठ माने जाते हैं।

कोर्स / प्रोग्राम

हमारे यहाँ विभिन्न प्रकार के व्यायाम सिखाये जाते है, जो आपके शरीर एवं स्वास्थ्य के लिए अनुकूल एवं लाभकारी होते हैं |

योग

योग एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है। जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्‍वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है।

प्राणायाम

अष्टांग योग का चौथा अंग है "प्राणायाम"। जो श्वांस हम लेते एवं छोड़ते है, उसी क्रिया को हमारे ऋषि - मुनियो ने एक विज्ञान प्रदान किया है।
उसी श्वांस एवं प्रश्वांस की प्रक्रिया को अनुशासित करते हुए अपने नियंत्रण के साथ तालयुक्त , लयबद्ध करते हुए चलना "प्राणायाम" है |